Nano Fertilizers नैनो उर्वरक वरदान या अभिशाप

Nano Fertilizers Benefits
Nano Fertilizers Benefits

Nano Fertilizers नैनो उर्वरक वरदान या अभिशाप

 नैनो-युग 1990’s  के दशक के अंत में शुरू हुआ और 2014 तक नैनोकण (Nano Fertilizers नैनो उर्वरक) का प्रयोग पर्यावरण छेत्र के लिए 23 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया और अनुमान है कि 2020 तक ये आकंड़ा 42 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।Nano Fertilizers नैनो उर्वरक यद्यपि नैनो शब्द एक नया शब्द प्रतीत होता है लेकिन यह क्षेत्र पूरी तरह से नया नहीं है। जब से धरती पर जीवन का प्रारम्भ हुआ तभी से निरंतर 3.8 अरब वर्षों से विकास के माध्यम से प्रकृति में परिवर्तन हो रहा है।

  दुनिया की बढ़ती आबादी को खिलाने के लिए फसल उत्पादन में वृद्धि के लिए नैनो उर्वरक वरदान साबित हो रहे है|

Nano Fertilizers नैनो उर्वरक , आकार में छोटे होने के कारण नैनो उर्वरक मृदा में आसान वितरित हो जाते है और मृदा सुधार में भी मदद करते है। जब हम बात उर्वरक की करते है तो हमे कुछ खास उर्वरको का ही ध्यान आता है जैसे की यूरिया, फॉस्फोरस तथा पोटाश या सल्फर जो की अधातु उर्वरक है| धातु तत्वों जैसे की लोहा (Fe), जस्ता (Zn), तांबा (Cu) आदि को मिलाकर 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। आजकल धातु नैनोकण का प्रयोग उर्वरक के रूप में बहुतायत में किया जा रहा है। जहा हम सामान्य  उर्वरक 50 किलो डालते है वही 4-5 किलो नैनो उर्वरक डालने से ज़्यदा  उत्पादन लिया जा सकता है।

                इसमें कोई संदेह नहीं की नैनोकण के प्रयोग ने मानव जीवन को सरल बनाया है। किन्तु इन कणो का अत्यधिक प्रयोग वातावरण तथा मानव के लिए हानिकारक भी हो सकता है। हाल के आकलन से पता चला है कि नैनो-साइज़ कॉपर और कॉपर-ऑक्साइड के दो सौ से अधिक मीट्रिक टन का उत्पादन 2010 और 5500 टन जिंक नैनो कण का उत्पादन किया गया था। प्रत्येक वर्ष हजारों टन नैनो कण पर्यावरण में छोड़ा जाता है, जिनमें से अधिकांश भाग मृदा में जा कर एकत्र होता हैं।

मृदा अथवा जल में छोड़े गए नैनोकण खाद्य फसलों में एकत्र होते है। डॉ. विष्णु राजपूत द्वारा साउथर्न फेडरल यूनिवर्सिटी, रूस में किये गये शोध में नैनोकण के साथ उगाये गये जौ  के पौधो  में कॉपर की मात्रा 7 गुना सामान्य पौधो की तुलना में अधिक थी। कई और फसलों पर हुए शोध में भी इस तरह की बात सामने आयी है। छोटा आकर होने के कारण नैनोकण आसानी से मानव शरीर में पानी, हवा एवं  ध्य पदार्थो के द्वारा प्रवेश कर जाते है और त्वचा, हृदय, फेफड़े सर्कुलेटरी लिम्फेटिक सिस्टम आदि को प्रभावित तथा कैंसर जैसे बीमारी पैदा कर सकता है।

खाद्य फसलों में नैनो उर्वरक के माध्यम से नैनो कण का संचय अत्यधिक चिंता का विषय है

क्योकि खाद्य फैसले सीधे तौर पर मानव स्वस्थ से जुड़ी है. अतः नैनोपार्टिकल्स का असीमित प्रयोग सोच समझ कर करना होगा।

डॉ. विष्णु राजपूत
(एम. एस. सी. कृषि; पीएचडी; पीडीएफ)
सिनियर रिसर्चर
रूस

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